जीवन में आगे बढ़ने के लिए वास्तु नियमों का पालन करें !!


-कमरे के दरवाजे की तरफ कभी भी सिर या पैर न रखें।


-दक्षिण पूर्व कोने में बैठने से बेचैनी होती है।


-दक्षिण पश्चिम में भूमिगत वाटर टैंक न रखें।


-दक्षिण और पश्चिम की तुलना में उत्तर-पूर्व अधिक साफ और रोशनी भरा होना चाहिए।


-पानी के स्रोत उत्तर और पूर्व में होने चाहिए।


-दक्षिण पश्चिम कोने को ब्लॉक कर दें। उसे भारी और ऊंचा कर. दें ताकि समद्धि की चुम्बकीय ऊर्जा को बरकरार रखा जा सके।


-दक्षिण पूर्व में सूर्य चरम पर होता है इसलिए यहां पर आग को जगह दें।


-दक्षिण पूर्व में टॉयलेट बनाने से गरीबी आती है।


-अगर उत्तर से ज्यादा दक्षिण में अधिक दरवाजे और खिड़की हैं, तो आप मुसीबत को दावत दे रहे हैं।


-उत्तर पूर्व को ब्लॉक न करें, उसे हल्का व खुला रखें।


-शुभ को आमंत्रित करने के लिए उत्तर पूर्व को साफ और खुला रखें।


-शुभ के लिए उत्तर पूर्व में साफ पानी के बर्तन में ताजे पीले फूल रखें।


-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए पूजा करते समय उत्तर पूर्व की ओर मुँह करें।


-एकाग्रता बढ़ाने के लिए पढ़ते समय उत्तर पूर्व की ओर चेहरा रखें.


-कानूनी कागजात उत्तर पूर्व में रखें।


-शुभ के लिए तांबे के बर्तन में गंगा जल भरकर उत्तर पूर्व में रखें।.


 -गर्भ के दौरान कमरे में उत्तर पूर्व में न सोएं, बच्चा असामान्य हो सकता है।


-उत्तर पूर्व में कूड़ा, झाडू, पोंछा न रखें, अशुभ है।


- उत्तर पूर्व में भारी चीजें स्टोर करने से तनाव बढ़ता है।


- उत्तर पूर्व में रसोई होगी तो टकराव और बीमारी रहेंगी।


-उत्तर पूर्व में स्टोररूम ऊर्जा के लौ को रोकता है।


-उत्तर पूर्व में ट्रांसफॉर्मर और जनरेटर रखने से दुर्घटनाएं होती है।


वास्तुविद-संजय कुमार गर्ग 8791820546