भवन में वास्तु सम्मत फर्नीचर कैसे लगायें !


जहां तक भवन में वास्तु सम्मत फर्नीचर रखने का संबंध है तो यहां दिए गए कुछ बिंदु इस दिशा में हमारी काफी मदद कर सकते हैं।


जैसे एक पूर्व मुखी भवन के पूर्व में बनें समस्त स्थानों जैसे एन्ट्रेन्स फोयर, लॉबी, ड्राइंग रूम में लकड़ी या कैन का बना हल्का फर्नीचर सर्वोत्तम होगा। ऐसे में आप भवन के पीछे के या दोनों तरफ की दिशाओं के दक्षिण-पश्चिम एवं उत्तर -पश्चिम में अपेक्षाकृत भारी फर्नीचर या बेड सजाएं तो उत्तम होगा। दूसरी स्थिति में यदि आप की बिल्डिंग उत्तरमुखी है तो जाहिर सी बात है कि आप का स्वागत कक्ष भवन के अग्रभाग यानी कि उत्तर-पश्चिम दिशा के वायव्य कोण या उत्तर के मध्य भाग या फिर पूर्वोत्तर में स्थित ईशान कोण में होगा। यहां ध्यान रखें कि ईशान कोण के ड्राइंग रूम में केवल अत्यंत कम वजन का एवं चमकदार पॉलिशयुक्त फर्नीचर, कुर्सियां, मेज या सोफा आदि रखें। शीशे के टॉप या दर्पण से युक्त शोकेस व हल्की अल्मारियां आदि यहां पर वास्तु की सृजनात्मक ऊर्जा में वृद्धि परिवार के बौद्धिक विकास में सहायक होगी।


उत्तर दिशा के भवन में ही उत्तर-पश्चिम या फिर पश्चिम मुखी भवन के इसी कोण या दिशा में बने ड्राइंग रूम में अपेक्षाकृत थोड़ा भारी व स्टील, पीतल आदि धातुओं से युक्त साजो-सामान वास्तु को सकारात्मकता प्रदान करेगा। भवन के पूर्व में बने शयन कक्षों में यथासंभव हल्का सामान, डबल बैड, दीवान आदि का प्रबंध करना चाहिए.


दक्षिणमुखी भवन में प्रायः वास्तु सम्मत ड्राइंग - रूम पूर्व की दिशाओं में ही होना चाहिए। जहां पर - पूर्वोत्तर से दक्षिण-पूर्व की आग्नेय दिशाओं की ओर बढ़ते क्रम में क्रमश: अत्यंत हल्के से शुरू करके भारी करते चले जाएं तो दक्षिण दिशा तक पहुंचते-पहुंचते तमाम फर्नीचर सबसे ज्यादा वजनदार हो जाएगा। उपरोक्त के अतिरिक्त कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातों पर अवश्य ध्यान दें जैसे पशु-पक्षियों को मारकर उनके अंगों, हड्डियों, सींग, खाल, दांत या नाखुनों से युक्त साजोसामान किसी भी भवन में नकारात्मक तरंगों में वद्धि करके हानिकारक परिणाम देता है। अत: जीवों के अंगों या शरीर के अवयवों से बने सामान आदि के प्रयोग को कदापि प्रोत्साहन न दें। यथासंभव गोलाकार या मंडाकार आकृति की टेबल आदि का प्रयोग न करके


वर्गाकार या आयताकार शक्ल का सामान प्रयोग करें। पत्थर के टेबल टॉप या मार्बल आदि से युक्त फर्नीचर, कॉर्नर आदि का प्रयोग सदा भवन के दक्षिण-पश्चिम, नैऋत्य कोण में ही करें।