सीखिए आंखों की भाषा, हर आंखें कुछ कहती हैं.......

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मित्रों, आंखें प्राचीनकाल से ही मन की मौन अभिव्यक्ति (साइलेंट एक्सप्रेसन) का माध्यम मीडियम रही हैं। आंखों की एक अपनी भाषा है, आंखों के इशारे से ही लोग ऐसी बाते कह जाते हैं जिनको वो जुबान से नहीं बोलना चाहते या नहीं बोल सकते। कहीं पर जहां बहुत सारे लोग बैठे हो,  दो लोग आपस में आंखों से ही अपने भाव प्रकट कर देते हैं, आंखों ही आंखों में किसी से प्यार हो जाता है, प्यार का इजहार हो जाता है, और वो आंखों ही आंखों में स्वीकार भी हो जाता है, और कहीं आंखों ही आंखों में हम अपने गुस्से को किसी से बयां कर देते हैं। साथियों! नमस्कार! मैं संजय कुमार गर्ग नवलेखा में एक नये लेख के साथ आपका स्वागत करता हूं-अब मैं आपको एक-एक करके आंखां की 10 प्रकार की भाषा या एक्सप्रेशन के बारे में बता रहा हूं-

1-झुकी आंखे शर्म और हया को व्यक्त करती हैं। भारत में स्त्रियां विशेषकर नववधुएं अपने से बड़ों के सामने नजरें नीचे किये रहती हैं, कोई गलती करते हुए पकड़े जाने वाले व्यक्ति की भी आंखें झुकी रहती हैं, परन्तु दोनों में अंतर है किसी की इज्जत में झुकने वाली आंखें अपने आप को छिपाती हैं, जबकि गलत काम करते हुए पकड़े जाने पर व्यक्ति की आंखे दूसरों से आंखे मिलाने से बचती हैं, इसलिए वह अपनी आंखे नीची कर लेता है।

2-किसी चीज विशेष को देखकर आंखों का फैल जाना और मुंह का थोड़ा सा खुल जाना विस्मय और आश्चर्य का बोधक होती हैं। इसका मतलब है कि वह किसी कार्य को देखकर अचंभित है।

3-किसी इंसान के अन्दर गुस्से की अभिव्यक्ति भी आंखों के द्वारा होती है, जैसे आंखो का फैल जाना और लाल हो जाना।

4-यदि कोई औरो से बचकर बार-बार किसी की ओर तिरछी नजरों से देखता है, यह उसके प्रति प्रेम को दर्शाता है। इसका मतलब है वह लड़का और लड़की एक-दूसरे से प्रेम करते हैं।

5-यदि किसी व्यक्ति के मन में चोर होता है या फिर यदि वह झूठ बोल रहा हो तो वह कभी सामने वाले से नजर मिलाकर बात नहीं कर सकता, वे बात करते समय हमेशा इधर-उधर देखते रहते हैं, और सामने वाले की नजरों से बचने का प्रयास करते हैं।

6-बिना किसी झिझक के आंखों में आंखे डालकर बात करने वाले लोग, सीधे और सच्चे होते हैं, ये स्वाभिमानी भी होते हैं, ऐसे लोगों की आंखों में एक विशेष प्रकार की चमक होती है। यह चमक उनके उज्जवल व्यक्तित्व को प्रकट करती है।

7-भावुक, संवेदनशील व दूसरों के दुख में दुखी होने वाले व्यक्ति की निगाहें सामने वाले के चेहरे पर टिकी रहती हैं, बात करते समय इनकी आंखें नम भी हो सकती है। ऐसे व्यक्ति उनके सच्चे हितेषी भी होते हैं।

8-जिस व्यक्ति के चेहरे पर हमेशा हंसी रहती है या जो व्यक्ति हमेशा मुस्कराता रहता है, ऐसे लोग खुशमिजाज होते हैं, और जिन्दगी को पूरी मस्ती से जीते हैं।

9-बात-बेबात के ठहाका लगाने वाले लोग व्यवहारिक तो हो सकते हैं, लेकिन ऐसे लोग स्वार्थी भी हो सकते हैं, और हर जगह अपना स्वार्थ देखते हैं।

10-खुलकर ठहाका लगाने के अवसरों पर केवल हल्की सी हंसी से काम चलाने वाले लोग दब्बू या अहंकारी किस्म के होते हैं, ये लोग कोई भी काम उसके महत्व के हिसाब से नहीं बल्कि अपनी आवश्यकता के हिसाब से करते हैं, ऐसे लोग किसी मिशन के तहत काम नहीं कर सकते।

-लेखक-संजय कुमार गर्ग (पामिस्ट, एस्ट्रोलॉजर, वास्तुविद) 6396661036