परिवार के स्वास्थ्य के लिए किचिन वास्तु का ध्यान रखें !


साथियों!! यदि किचिन को घर का स्वास्थ्य मंत्रालय कहा जाये तो अनुचित नहीं होगा। क्योंकि यदि हम अपने किचिन के वास्तु की अनदेखी करेंगे तो न केवल गृहणी बल्कि घर के अन्य सदस्य भी स्वस्थ नहीं रह सकते। देखने में आता है कि वास्तु के विपरित बनायी गयी रसोई किचिन-एक्सीडेन्ट के साथ-साथ घर में अनचाहे मेहमानों की संख्या में भी वृद्धि करती है, तो साथियों!! प्रस्तुत हैं किचिन के लिए कुछ महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स-
1-रसोई घर बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिशा दक्षिण-पूर्व यानि SE दिशा है अत इसी दिशा में हमें रसोई घर बनाना चाहिए।
2-यदि किसी कारणवश घर के आग्नेय कोण में रसोई नहीं बन सके तो इसका निर्माण घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा यानि SW या उत्तर-पश्चिम दिशा यानि NW हिस्से के दक्षिण-पूर्व हिस्से में किया जा सकता है, वैसे ये रसोईघर घर में अतिथियों की संख्या में वृद्धि करता है।
3.गैस का चूल्हा या कुकिंग रेंज को रसोई घर के दक्षिण.पूर्वी SE कोने में रखा जाना चाहिये।
4-किसी भी स्थिति में घर के उत्तर-पूर्व दिशा यानि NE में किचिन का निर्माण नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से धन की हानि होने के साथ-साथ पुत्र संतान के बीमार होने या चरित्रहिन होने की संभावना रहती है। यदि पुत्र संतान नहीं है, तो उसके होने की संभावना समाप्त हो सकती है।



5-रसोई घर में खाना बनाते समय गृहणी का मुंह पूर्व दिशा यानि (E) की ओर होना सबसे अच्छा माना जाता है।
6-रसोई घर में खाना बनाते समय यदि गृहणी का मुंह उत्तर दिशा यानि  (N) की ओर रहता है, तो ऐसी किचिन में हमेशा चलती रहती है, उसमें कुछ ना कुछ पकाने आदि का काम हमेशा लगा रहता है।
7-रसोई घर में खाना बनाते समय यदि गृहणी का मुंह दक्षिण दिशा यानि (S) की ओर रहता है, तो मेरी दृष्टि में ये सबसे ज्यादा गलत स्थिती है, ऐसी रसोई में बरकत कम होती है, किचिन की सामग्री बहुत जल्दी समाप्त हो जाती है, और किचिन में दुर्घटनाएं (किचिन एक्सीडेन्ट) होने की सबसे ज्यादा संभावनाएं रहती हैं।
8-किचिन में पानी स्टोर करने के उपकरण जैसे आर ओ, पानी फिल्टर, मटका, जग आदि रखने का सबसे अच्छा स्थान उत्तर-पूर्व दिशा NE होती है।
9-सिंक (बर्तन साफ करने का स्थान) का सही स्थान दक्षिण दिशा (W) दिशा  है।
10-बिजली से चलने वाले उपकरण रखने की सही दिशा दक्षिण-पूर्व दिशा यानि (SE) दिशा  है।
11-फ्रिज पश्चिम W, दक्षिण S  या दक्षिण-पूर्व SE दिशा में रखना चाहिए।
12-खाने के लिए प्रयोग की जाने वाली सामग्री जैसे अनाजें, दाल, चीनी आदि को रखने का स्थान दक्षिण S या पश्चिम W दीवार पर बनाना चाहिए।
13-वास्तु के अनुसार किचिन के बराबर में शौचालय नहीं बनाना चाहिए।
14-जहां तक संभव हो किचिन में पूजा का स्थान भी नहीं होना चाहिए।
   -संजय कुमार गर्ग (वास्तुविद्) Mob. 8791820546