वृद्धाश्रम न होकर समाधान आश्रम होने चाहिए

       


हापुड़। वृद्धाश्रम में जब व्यक्ति अधिक बिमार होता है तो वहां कें संचालक हाथ खड़े कर देते हैं और कहते हैं कि अब तुम अपने घर जाओं हम तुम्हारा खतरा नहीं उठा सकते। अगर उन्हें घर जाना होता तो वे आते ही क्यों? जो स्वस्थ होते है, वे थोड़ी ही अनबन होते ही अपना घर छोड़ कर वृद्धाश्रम की ओर जाना चाहते हैं क्योंकि यहां उन्हें कुछ नहीं करना पड़ता और निःशुल्क सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और वे कतई नकारा हो जाते हैवैसे भी समाज इनके प्रति करूणाई दृष्टि से देखता है और समय-समय पर इन्हें सामग्री उपलब्ध कराता रहता है। निसंदेह युवाओं का दृष्टिकोण बुजुर्गों के प्रति नकारात्मक हो रहा है किन्तु सभी गलतियां युवाओं की ही नहीं होती, बुजुर्गों को भी समायोजन करके चलना चाहिए।  वास्तव में इनके लिए वृद्धाश्रम नहीं, समाधान आश्रम होने चाहिए, जहां बुजुर्ग घर-परिवार में कहासुनी होने पर एक-दो दिन या कुछ समय के लिए चले जायें तथा खेल कूदकर सत्संग में हिस्सा लेकर स्वस्थ मन से वापिस लौट जायें तथा काम भी करें और समाधान केन्द्र में भी हिस्सा लें। (सप्रग)