पैरों के दर्द की अनदेखी न करें !


क्या थोड़ा सा भी चलने से आपके पैर दुखने लगते हैं? क्या कभी-कभी वे सुन्न या ठंडे और बेजान हो जाते हैं? यदि आपको यह सब होता है तो शायद आपको 'पेरीफेरल आरटीरियल डिजीज' यानी 'पैड' है। इसका सरल मतलब है कि आपकी टांगों की धमनियां सिकुड़ गया हैं और उनमें रुकावट की वजह से सही रक्त संचार नहीं हो रहा।


यदि आप इस तरह के दर्द को नजरअंदाज करते हैं और इसका इलाज नहीं करवाते तो हो सकता है कि आगे जाकर आपको बहुत तकलीफ झेलनी पड़े। टांगों में खून न पहुंचने से और सही प्रचलन न होने से, हो सकता है कि आपको गैगरीन हो जाए।


यदि आपकी टांगों की धमनियां रुकी हुई हैं तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी प्रभाव डालती है


जिससे कि कभी-कभी आपके दिल के आसपास वाली धमनियों और दिमाग के आस-पास वाली धमनियों में भी रुकावट भी आ सकती है। इससे आपको दिल के दौरे का खतरा बढ़ सकता


डाक्टर राडनी रांबे कहते हैं कि आमतौर पर लोगों को यह पता ही नहीं कि उन्हें 'पैड' की बीमारी है। वे सोचते हैं कि उनकी टांगों में दर्द सिर्फ वजन बढ़ने के कारण या फिर उम्र की वजह से है।


डाक्टर राबे के अनुसार इस बीमारी को आसानी से रोका जा सकता है और जितनी जल्दी इसके बारे में जानकारी हासिल हो, उतना ही फायदेमंद है। सबसे पहले तो इसे रोकने के लिए आपको सिगरेट छोड़नी पड़ेगी। ऐसे हालात में चलना बहुत जरूरी है। आपको नित्य प्रतिदिन कम से कम दो किलोमीटर चलना चाहिये। इससे आपकी टांगों की धमनियों में प्रचलन ठीक होगा और खून दौड़ेगा।


कभी-कभी डाक्टरों की सलाह से यदि आप एस्पिरीन भी लें तो वह खून को पतला करने में और इस वजह से प्रचलन सही करने में मदद करती है लेकिन यह जरूरी है कि आप अपनी टांगों में दर्द और उनके सुन्न हो जाने की शिकायत या फिर टांगों के ठंडा हो जाने को नजरअंदाज न करें। डाक्टर को दिखा कर सही सलाह लेकर चलें।