पढ़कर सोने से जल्दी याद होता है !!


प्राचीन काल में लोगों का विश्वास था कि समय बीत जाने के कारण व्यक्ति भूल जाता है। ज्यों-ज्यों सीखने और पुनर्वाहन के बीच समय बीतता जाता है, विस्मृति की क्रियाएं पनपने लगती है। अभ्यास यदि एक ओर स्नायु  मंडल में संयोजक सीमित करता है तो दूसरी ओर बिना अभ्यास के ये समाप्त हो जाते हैं।


विभिन्न प्रयोगों द्वारा ज्ञात हुआ है कि सीखने के तुरंत बाद सो जाने पर विस्मृति का प्रभाव कम पड़ता है। लगभग एक घंटे सो जाने के बाद सीखी हुई क्रियाओं के संयोजक स्थिर होने लगते हैं। दूसरी ओर निद्रा के अभाव में विस्मृति का विकास शीघ्रता से होता है।


जब वर्तमान समय में पुनर्वाहन के लिए समुचित उद्दीपक न हो, बीती घटनाओं की पुनरोत्पति नहीं हो पाती। देखा गया है कि कुछ मानसिक और शारीरिक रोग स्मृति का नाश करते हैं। इन रोगों में बुखार, उन्माद एवं मनोविद्लता उल्लेखनीय है।


प्रबल संवेगों अथवा बिजली के झटके के कारण विस्मृत की क्रियाएं प्रभावित होती हैं। सीखने के तुरंत बाद बिजली का झटका सीखने वाले को दिया जाए तो वह सीखी हुई सामग्री का बहुत बड़ा भाग भूल जाता है। इसी प्रकार प्रत्यावाहन के समय यदि व्यक्ति में कोई प्रबल संवेग उत्पन्न हो जाए तो वह सीखी हुई सामग्री या विषय को भूल जाता है और चोट के कारण भी स्मृति का नाश हो जाता है।