चेहरे से व्यक्ति के बारे में जाने !!


सामुद्रिकशास्त्र एक पूर्ण शास्त्र है, उसमें चेहरे का विश्लेषण किया हुआ है, जिसमें सत्य, रजस और तमस इन तीनों रूपों का विशद विवेचन किया गया है। सत्य की पंक्ति में वे व्यक्ति आते हैं, जो करुणाशील, सुशील, क्षमावान, दयावान हैं। ये व्यक्ति किसी भी हालत में दूसरों को हानि नहीं पहुंचाते। यदि कोई इन्हें नुक्सान भी पहुंचाए तो भी इनके सद्गुण ही प्रकट होता है। रजस की पंक्ति में वे व्यक्ति आते हैं जो स्वत: तो उत्तेजित नहीं होते, लेकिन यदि उन्हें उत्तेजित कर दिया जाय तो अपना संतुलन खो देते हैं और प्रतिक्रियावादी हो जाते हैं। उल्लेखनीय है कि इस श्रेणी के व्यक्तियों को भूल का अहसास भी जल्दी हो जाता है। तमस श्रेणी के व्यक्ति मुख्यतः उत्तेजना की स्थिति में ही जीते हैं और विवेक को तो यदा-कदा ही काम में लाते हैं। यदि ऐसे व्यक्ति को और अधिक उत्तेजित कर दिया जाये, तो वह किस सीमा तक जायेगा कहना मुश्किल है। यदि किसी व्यक्ति के चेहरे का प्रथम भाग अर्थात माया उन्नत एवं प्रभायुक्त है, एवं चेहरे के अन्य दो भाग उस अनुपात में कम विकसित हैं, तो ऐसा व्यक्ति सृजनशील होता है लेकिन अपने विचारों को अमल में नहीं ला सकेगा। ऐसे व्यक्ति का मित्र, सहयोगी वह व्यक्ति होना चाहिये, जिसके चेहरे का निचला भाग यानी निष्पादन क्षेत्र उन्नत एवं संतुलित हो। वास्तव में व्यक्ति को उसका कार्य क्षेत्र अपने चेहरे के सबसे उत्तम भाग के आधार पर करना चाहिये। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि तनावग्रस्त आदमी या तो अपने आप को हड्डियों का ढांचा बना लेगा या जरूरत से ज्यादा मोटा हो जायेगा। अत: भोजन को संतुलित कर हम अपने शरीर को ठीक पा सकते हैं। शरीर के द्वारा ही मनुष्य भौतिक सुख को भागता है और आध्यात्मिक उपलब्धियों को प्रास कर सकता है। शरीर के द्वारा ही मनुष्य भौतिक सुख सुविधाओं को भोगता है और आध्यत्मिक उपलब्धियों को प्राप्त करता है।