"प्यार" के तीन पड़ाव (हास्य लघु कथा)


वैवाहिक जीवन का पहला पड़ाव- नयी-नयी शादी हुई है, “पतिदेव“ प्रातः सेविंग कर रहे हैं तभी उनको ब्लैड लग जाता है।
आह... की हल्की आवाज उनके मुंह से निकली, पत्नी किचिन से भागी हुई आयी!
'डार्लिंग' ब्लैड लग गया! पति ने पत्नी से 'नार्मल' होते हुए कहा!
(पत्नी जल्दी से 'डिटाल' लाती है।)
अरे! कितना सारा ब्लड निकल गया, आज आप आफिस मत जाइये, घर पर ही रेस्ट कीजिए! पत्नी दुःखी स्वर में 'डिटाल' लगाती हुई बोली!



वैवाहिक जीवन का दूसरा पड़ाव- अब बच्चे हो जाते हैं, “पति महोदय“ रोज की तरह सेविंग कर रहे है, उनको ब्लैड लग जाता है।
उफ!! नीरूSSS ब्लैड लग गया, 'पति महोदय' होने वाले 'दर्द' से भी 'तेज' चिल्लाये।
आप! भी ना, इतने साल आपको सेविंग करते हुए हो गये, परन्तु अभी तक आपको सेविंग करनी नहीं आयी, ये लो 'फिटकरी' लगा लो, मैं आपका और बच्चों का लन्च तैयार कर रहीं हूँ। पत्नी झल्लाती हुइ 'फिटकरी' पटकते हुए वहां से चली गयी।



वैवाहिक जीवन का तीसरा पड़ाव- बच्चों का विवाह हो चुका है। “पति जी“ सेविंग कर रहे हैं और उनको ब्लैड लग जाता है!
हायSSS मर गया! अरे 'रितिक' की 'अम्मा' कहां है 'तू'?
''क्यों चिल्ला रहे हो, इतना गला फाड कर, ब्लैड ही लगा है, कोई तलवार तो नहीं लगी? कितनी बार कहां है, अब अपने आप 'दाड़ी' मत बनाया करो, नाई से बनवा लिया करो, पर तुम्हे तो जवान बनने की लगी है ना!'' वृद्ध पत्नी बिस्तर में लेटे-लेटे चिल्लाई।
अलमारी में 'डिटाल' या 'फिटकरी' रखी होगी लगा लो!
ये कहकर पत्नी ने चादर मुंह तक तान ली!


किसी ने ठीक कहा है-
प्यार में  हम जो-जो आगे बढ़ते गये,
'आप' से 'तुम' तुम से 'तू' होते गए!


लेखक-संजय कुमार गर्ग