पुखराज कब, कौन और क्यों पहनें !


देवताओं के गुरू बृहस्पति का रत्न पुखराज है, वैसे तो पुखराज कई रंगों में आते हैं लेकिन मुख्य पुखराज का रंग पलाश के फूलों जैसा होता है।


जानिए पुखराज रत्न की विशेषता-


यह रत्न बृहस्पति ग्रह से सम्बन्धित होता है, बृहस्पति ग्रह की दो राशियॉ होती है धनु और मीन। जिन जातकों की कुण्डली में गुरू ग्रह पीडित होकर अशुभ फल दे रहा हो, उन्हें पुखराज धारण करने को सलाह दी जाती है।


पुखराज धारण करने के फायदे-


-पुखराज रत्न धारण करने से मान-सम्मान व कीर्ति में वृद्धि होती है।
-इसे पहनने से शिक्षा व करियर के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
-इस रत्न को पहनने से व्यक्ति में धर्म-कर्म के प्रति रूचि बढ़ती है।
-अगर किसी के विवाह में बाधायें आ रही है तो उन लोगों को पुखराज रत्न पहनने से लाभ मिलता है।
-प्रशासनिक अधिकारियों, वकीलों, न्यायधीशों, शिक्षकों व राजनेताओं को पुखराज धारण करने से विशेष लाभ मिलता है।
-मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन लग्न वाले लोगों को पुखराज पहनने से सन्तान, विद्या, धन, यश आदि में सफलता मिलती है।


किन रत्नों के साथ पुखराज न पहनें-


पुखराज के साथ पन्ना, नीलम, हीरा, गोमेद व लहसुनियॉ नहीं पहनना चाहिए अन्यथा लाभ की जगह हानि होती है। वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व कुम्भ लग्न वाले जातकों पोखराज नहीं पहना चाहिए। इन लग्नों में बृहस्पति ग्रह अकारक होता है, इसलिए पुखराज पहनने से हानि होती है। अगर छठें, आठवें व 12वें भाव का स्वामी है तो पुखराज कदापि धारण करें वरना नुकसान के लपेटे में आ सकते है।


स्वास्थ्य में पुखराज के लाभ-


यदि आप का लीवर ठीक से काम नहीं कर रहा है और आप हेपेटाइटिस जैसे रोग से ग्रस्त है तो सोने की अगूठी में पुखराज अवश्य पहने। अल्सर, गठिया, पेचिंस, नपुंसकता, ह्रदय आदि रोगों में पुखराज पहनने से फायदा होता है। ज्वर, पीलिया, तिल्ली का बढ़ जाना, वीर्य वृद्धि, वातरोग नाशक, बवाशीर नाशक व गैस आदि रोगों में पुखराज लाभ करता है। पुखराज के उपरत्न सुनैहला, केरू, घीया, केसरी, पीला हकीक व टोपाज आदि।


पुखराज धारण करने की विधि-


बुधवार के दिन प्रातःकाल स्नान-ध्यान करके पन्ने को गंगाजल में दूध मिलाकर डाल दें । फिर दूसरे दिन गुरूवार को स्नान-ध्यान करके ''ऊॅ बृं बृहस्पते नमः की कम से कम एक माला का जाप करने के बाद पुखराज को तर्जनी उॅगुली में शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरूवार को धारण करें। सूर्योदय से लेकर सुबह 10 बजे तक पुखराज धारण कर लें। बुधवार, गुरूवार और शुक्रवार को इन तीन दिन तक नानवेज एंव धूम्रपान कदापि न करें अन्यथा पुखराज पहने से विशेष लाभ नहीं होगा।