सफलता के लिए एकाग्रता आवश्यक है !


सफलता के लिए एकाग्रता बहुत आवश्यक होती । एकाग्र हो, तो पूरी ऊर्जा एक ही दिशा में बहती है। मगर यह सभी के बस की बात नहीं है, क्योंकि अधिकतर लोगों का मन बिखरा-बिखरा सा रहता है, उसे समेटकर एक बिन्दु पर लाने के लिए काफी कोशिश करनी पड़ती है। क्रिकेट जैसे खेलों में हजारों की भीड़ को भुलाकर सिर्फ आती हुई गेंद और अपने बल्ले पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए एकाग्र होना एक तरह का ध्यान ही होता है।
विख्यात क्रिकेटर सुनील गावस्कार एकाग्रता के लिए मशहूर रहे हैं। वह क्रिकेट के जितने शौकीन हैं, उतने ही ग्लूकोज बिस्किट के भी। उन्होंने कहा कि गरम चाय में कुरकुरे बिस्किट को डुबोकर खाना एकाग्रता का पहला पाठ है - बिस्किट चाय में डूबे तो सही, लेकिन टूटे नहीं। यही नहीं उन्होंने एक और मजेदार प्रयोग दिखाया। एक प्लेट में चार बिस्किट एक-दूसरे से सटाकर रखे और बीच में खाली जगह बनाई। उस खाली जगह में चाय उडेली और फिर बिस्क्टिं को बिना हिलाए चाय को वापिस कप में डाला। बिस्किट आधे सूखे और आधे गीले हो गये। उस क्षण उनकी एकाग्रता किसी योगी से कम नहीं थी। उन्होंने कहा, इसका अभ्यास करें और फिर यही एकाग्रता आप खेल के मैदान में ले आयें। ओशो कहते हैं एकाग्रता साधने की गहरी कुंजी है, श्वास का नियंत्रण। निरंतर श्वास पर ध्यान रखें, तो एकाग्रता सहज फलित हो जायेगी।
ध्यान को श्वास के साथ जोड़ लें। जो भी छोटे-छोटे काम कर रहे हों, उनके कामों पर एकाग्र रहें। खाना खा रहे हैं, तो पूरी एकाग्रता से खाएं। एक एक कौर पूरे ध्यानपूर्वक उठाएं। यह मन की आदत बन जाए, तो बड़े कामों में भी ध्यान विचलित नहीं होगा।